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मंगलवार, 16 मई 2017

जीएसटी GST खास बातें


संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक के पारित होने की उम्मीद जताई है.


जीएसटी का पूरा नाम गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) है. यह केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए गए 20 से अधिक अप्रत्यक्ष करों के एवज में लगाया जा रहा है. जीएसटी 1 जुलाई से पूरे देश में लागू किया जाना है. जीएसटी लगने के बाद कई सेवाओं और वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स समाप्त हो 

जीएसटी  GST खास बातें  :-

 1. सरकार के अनुसार, जीएसटी आज़ादी के बाद टैक्स सुधार का सबसे बड़ा कदम है. इससे जीडीपी में वृद्धि और रोज़गारों का सृजन होगा. 13वें केंद्रीय वित्त आयोग के अनुसार जीएसटी से कर संकलन में हो रहे कई तरह के व्यर्थ के खर्चों को रोकने में भी इससे सहायता मिलेगी और इससे राज्यों की आर्थिक हालात में सुधार होगा.

क्या होता है GST 

2. विश्व के लगभग 160 देशों में जीएसटी की कराधान व्यवस्था लागू है. भारत में इसका विचार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा साल 2000 में लाया गया.

3. जीएसटी लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट / सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लक्ज़री टैक्स खत्म हो जाएंगे.

https://youtube.com/shorts/o26UfJI45DU?feature=share https://youtube.com/shorts/LDF2UWb2pZ4?feature=share
4. जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स वसूले जाएंगे. पहला सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी, जो केंद्र सरकार वसूलेगी. दूसरा एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी, जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी. तीसरा होगा वह जो कोई कारोबार अगर दो राज्यों के बीच होगा तो उस पर आईजीएसटी, यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी वसूला जाएगा. इसे केंद्र सरकार वसूल करेगी और उसे दोनों राज्यों में समान अनुपात में बांट दिया जाएगा.

5. जीएसटी लागू होने से हर प्रकार की खरीद फरोख्त इस कर व्यवस्था के तहत आ जाएगी, जिससे लोगों के लिए करों की चोरी कर पाना आसान नहीं होगा. कहा जा रहा है कि जीएसटी काले धन से निपटने के लिए एक मजबूत हथियार साबित होगा.

6. जानकारों की राय में शुरुआती तीन सालों में जीएसटी महंगाई बढ़ाने वाला टैक्स साबित होगा, जैसा मलेशिया और अन्य देशों के उदाहरणों से स्पष्ट है. अभी हम सारी सेवाओं पर लगभग 14.5 फीसदी सर्विस टैक्स दे रहे हैं, जो जीएसटी लागू होने पर 18% से 22% के बीच हो जाएगा. यानी कि जीएसटी लागू होने के बाद सिनेमा हॉलों के टिकट, होटल का बिल, बैंकिंग सेवा, यात्रा टिकट आदि महंगी हो जाएंगी.

रविवार, 11 सितंबर 2016

क्या है लघु उद्योग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया


क्या है लघु उद्योग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 

भारतवर्ष में लघु उद्योगों अर्थात Small scale industries का state directorate of industries से registration करवाना अनिवार्य नहीं है | लेकिन यदि कोई उद्यमी जो small scale industries में कदम रखना चाह रहा हो, यदि वह चाहता है की उसको सरकार द्वारा चालित योजनाओं के अंतर्गत कुछ प्रोत्साहन लाभ मिले तो SDI में Registration करवा लेना चाहिए | इसके अलावा कुछ निर्धारित वस्तुओं का उत्पादन करने के लिए राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार दोनों से लाइसेंस लेना पड़ सकता है | बेशक चाहे Laghu Udyog  पंजीकृत है, या नहीं,
 लेकिन राज्य में चालित नियम कानूनों का उस उद्योग को भी अच्छे ढंग से पालन करना अनिवार्य है | इसलिए बेहतर यही होता है की Registration करवाकर ही Small scale industries में कदम रखा जाय  . 


पंजीकरण (Registration) के प्रकार :

लघु उद्योगों को निम्न दो तरह से Registered करवाया जा सकता है |

1. अस्थायी पंजीकरण

Small scale industries अर्थात लघु उद्योगों का यह Registration लघु उद्योग की स्थापना से पूर्व किया जाता है | इस Registration के अंतर्गत दिए जाने वाले प्रमाण पत्र (Certificate) की वैधता (Validity) दो वर्षो के लिए निर्धारित होती है | इन दो सालों में यदि लघु उद्योग इकाई द्वारा कोई उत्पादन नहीं किया जाता है | तो उद्यमी राज्य उद्योग निदेशालय से इस प्रमाण पत्र का Renewal करवा सकता है | और इस स्थिति में राज्य उद्योग निदेशालय द्वारा उद्यमी को केवल छह महीने का समय उत्पादन हेतु दिया जाता है | और केवल छह महीने के लिए   ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है |

2. स्थायी पंजीकरण

इस Registration के अंतर्गत किसी भी लघु उद्योग को प्रमाण पत्र दो साल अर्थात अस्थायी प्रमाण पत्र की validity ख़त्म होने के बाद मिलता है | इसके अलावा यह Certificate तब मिलता है, जब लघु उद्योग पूरी तरह से उत्पादन (Production) में आ चूका होता है | यह registration  भी राज्य उद्योग निदेशालय के द्वारा ही कराया जाता है | चूँकि यह एक स्थायी Registration होता है, इसलिए इसकी वैधता भी स्थायी होती है |

लघु उद्योग पंजीकरण करवाने के फायदे:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में पहले ही बता चुके हैं की Small Scale industries के लिए registration process कोई अनिवार्य process नहीं है | लेकिन लघु उद्योग का पंजीकरण करवाना किसी भी उद्यमी को कुछ फायदे दिला सकता है | जो निम्नवत है |

बैंको से ऋण मिलने में प्राथमिकता या आसानी |

बैंको से मिलने वाले लोन पर ब्याज दर की कमी |

Excise tax में छूट की योजना |

कानून के मुताबिक प्रत्यक्ष कर में छूट |

आरक्षण का प्रावधान |

Current Scenario वर्तमान स्थिति):

वर्तमान में भारत सरकार ने MSME के Registration process को बेहद सरल बनाकर इसको Online कर दिया है | कोई भी उद्यमी UAM के Portal पर जाकर अपनी Unit को register करवा सकता है | लेकिन इसके लिए उद्यमी के पास आधार कार्ड होना अनिवार्य है | इस पोर्टल में अपनी detail एकदम सही से भरें | क्योंकि एक बार submit करने के बाद editing का प्रावधान नहीं है | सबसे बढ़िया बात यह है की अपनी Unit की detail भरते वक़्त आपको इस UAM portal  में कोई documents अपलोड नहीं करना है | सरकार ने कागज़ी प्रक्रिया को स्वप्रमाणिक (self certified) रखा हुआ है |

UAM क्या है :

UAM का फुल फॉर्म Udyog Aadhaar Memorandum है | जो किसी उद्यमी को उसका उद्यम रजिस्टर कराते वक्त सरकार को देना होता है | इस प्रक्रिया के अंतर्गत उद्यमी से उसका आधार नंबर, नाम, उद्यम, उद्यम स्थापित करने की तिथि इत्यादि डिटेल्स  online एक form के माध्यम से पूछी जाती है |  साधारण शब्दों में UAM मध्यम उद्योगों, लघु  उद्योगों और कुटीर उद्योगों अर्थात MSME  को online registration कराने की एक प्रक्रिया है | और यह बिलकुल मुफ्त है | इसमें किसी भी प्रकार की कोई Registration fee उद्यमी को नहीं देनी है | आप अपने उद्योग को उद्योग आधार की वेबसाइट पर जाकर register करवा सकते हैं |

कुटीर उद्योगों अर्थात MSME  को online registration कराने की एक प्रक्रिया है | और यह बिलकुल मुफ्त है | इसमें किसी भी प्रकार की कोई Registration fee उद्यमी को नहीं देनी है | आप अपने उद्योग को उद्योग आधार की वेबसाइट पर जाकर register करवा सकते हैं |

कैसे करे Pvt.Ltd. कम्पनी का रजिस्ट्रेशन


कैसे करे Pvt.Ltd. कम्पनी का रजिस्ट्रेशन 

चूंकि भारतवर्ष (India) एक युवा देश है | भारतवर्ष (India) की 65% से भी अधिक जनता 37 से कम साल की है | और युवाओ में अपना कारोबार करने की महत्वकांक्षा छिपी रहती है | क्योकि हर नौकरीपेशा व्यक्ति को नौकरी के दौरान लगता है, की जो उन्हें मिल रहा है वह कम है | अर्थात उन्हें उनकी काबिलियत  मेहनत  के मुताबिक वेतन नहीं मिल रहा | बस यही विचार उनके अंतर्मन में अपना कारोबार  शुरू करने की महत्वकांक्षा पैदा करता है | और बहुत सारे कारणों में से एक कारण व्यक्ति का कुछ नया (Innovative) करने का जज्बा और दुनिया में दौलत, शौहरत Kamai करने का भी होता है | यदि आपके अंतर्मन में भी अपना कारोबार (Business) शुरू करने की महत्वकांक्षा  हिचकोले ले रही हैं | लेकिन आप समझ नहीं पा रहे हैं की कंपनी कैसे शुरू करूँ | तो आज हम आपको भारतवर्ष (India) में एक Private Limited Company कैसे शुरू की जा सकती है के बारे में बताने वाले हैं |


How to register a company in Hindi

भारतवर्ष (India) में Private Limited Company Register करना पहले एक जटिल प्रक्रिया हुआ करती थी | क्योकि आपको अपनी Company Register कराने के लिए विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे | लेकिन भारत में निवेश को बढ़ाने एवं नए उद्यमियों (Businessman) को पैदा करने के लिए भारत सरकार ने इस प्रक्रिया को Online कर दिया है | अर्थात अब आपकी कंपनी की अधिकतर Registration प्रक्रियाएं Online हो सकती हैं | इस प्रक्रिया के लिए आपको आपकी कंपनी में कम से कम दो सदस्यों की जरुरत होगी | नई सरकार के सत्ता में आने के बाद एक महीने में लगभग 7000 तक नई नई कंपनिया Register हो रही हैं | जुलाई 2015 से सितम्बर 2015 इन तीन महीनो में लगभग 21000 नई कंपनिया Register हुई हैं |

Private Limited Company खोलने के लिए सबसे पहले आपको Form INC-29 भरना होता है | जो की Ministry of Corporate Affairs की वेबसाइट पर उपलब्ध है | फिर इस Form के साथ जरुरी कागजाद संगलग्न करके Registrar of Companies के ऑफिस में जमा कराना होता है | उसके बाद Ministry of corporate affairs आपके कंपनी के कागजाद को जांचेगी और यदि वह आपके company के नाम को स्वीकृत कर लेती है तो आपकी Company के नाम से Ministry of corporate affairs, incorporation जारी करेगा | और यदि आपका Company का नाम स्वीकार नहीं किया जाता है तो आपको अपनी कंपनी का नाम बदलना पड़ेगा |

Ministry of corporate affairs कारोबारी (Businessman) जो अपनी Private Limited Company शुरू करना चाहते हैं | उनको तीन प्रकार के Package में से कोई एक Package चुनने का विकल्प देता है | ये तीन प्रकार के पैकेज इस प्रकार हैं |

Basic –Fast Track Package

इस पैकेज का नाम MCA ने Basic- Fast Track रखा है | और इस पैकेज की फीस रूपये 15899 तय की गई है | और इस पैकेज के अंतर्गत MCA कारोबारियों को DSC (Digital Signed Certificate), DIN (Director Identification Number), MOA (Memorandum of Association), AON (Approval on Name), PAN (Permanent Account Number) , TAN (Tax Account Number) इत्यादि सेवाए देता है | अर्थात उपर्युक्त सब प्रकार की फीस इस रूपये 15899 में सम्मिलित है | 

Standard – Fast Track Package

दूसरे पैकेज का नाम MCA ने Standard – Fast Track रखा हुआ है | Standard – Fast Track package की फीस MCA द्वारा 19899 रूपये तय की गई है | इस पैकेज के अंतर्गत जो Basic Package में सेवाएँ दी हैं वो तो सम्मिलित हैं ही हैं | इसके अलावा इस पैकेज में MCA द्वारा आपकी कंपनी के लिए Accounting Software Setup भी किया जायेगा | और कंपनी को Share Certificate और Company Kit की सेवाए भी दी जाएँगी |

Premium Fast Track Package :

MCA द्वारा किसी कंपनी को रजिस्टर करने हेतु जो तीसरा Package निर्धारित किया गया है | उसका नाम Premium Fast Track Package है | इस पैकेज की फीस 25899 रूपये तय की गई है |

इस पैकेज में उपर्युक्त दोनों पैकेज में सम्मिलित सेवाओ की फीस को तो सम्मिलित किया ही गया है | इसके अलावा इस पैकेज में Company Trademark Registration फीस को भी सम्मिलित किया गया है | इसलिए इस पैकेज की फीस दोनों पैकेज से अधिक है |

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलने के लिए आप उपर्युक्त में से अपनी आवश्यकतानुसार कोई भी पैकेज चुनकर अपनी कंपनी का रजिस्ट्रेशन करवाकर अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं |

साधारणतया एक Private Limited Company के Registration प्रक्रिया को पूरा होने में 16 से 22 दिन का समय लगता है | लेकिन यह समय और भी लम्बा हो सकता है यदि आप समय पर कंपनी के Registration सम्बन्धी कागजाद जमा ना कराएँ | आप जितनी जल्दी अपनी कंपनी सम्बन्धी कागजाद जमा कराएँगे | उतनी जल्दी सरकार से स्वीकृति मिलने की संभावना होगी | नवीन विचारधारा को जल्दी स्वीकृति मिल सकती है | आप अपने कंपनी सम्बन्धी कागजाद Online और Offline दोनों तरह से जमा करा सकते हैं |


किसी Private Limited Company में कम से कम दो डायरेक्टर्स और अधिक से अधिक 15 डायरेक्टर्स हो सकते हैं | यानिकी कम से कम दो व्यक्ति मिलकर एक Private Limited Comapny खोल सकते हैं | Ministry of Corporate Affairs किसी Private Limited Company को कम से कम दो और अधिक से अधिक 200 शेयर होल्डर्स रखने की इजाजत देता है |

Eligibility to become Director in Hindi

किसी Private Limited Company में Director बनने के लिए व्यक्ति को वयस्क अर्थात 18 साल या 18 साल से ऊपर की आयु का होना चाहिए | जबकि शैक्षणिक योग्यता सम्बन्धी कोई नियम लागू नहीं है | इसलिए एक अनपढ़ व्यक्ति भी किसी Company में Director बन सकता है | किसी Private Limited Company में Director बनने के लिए जरुरी नहीं है की वह भारत का ही नागरिक हो कोई विदेशी भी भारतवर्ष में किसी Company का Director बन सकता है |

Required Capital to enroll a Private Limited Company in Hindi


Private limited company की worth के बारे में कोई निश्चित पैसो की मात्रा तय नहीं की गई है | हालांकि अपनी Company को Private Limited में Register कराते समय आपको रूपये 1 लाख Registration फीस के रूप में देने होते हैं | वैसे यह फीस Registration फीस न होकर Authorized Capital Fee कहलाती है जो आपको कंपनी को Register कराते समय सरकार को देना होता है | इसके अलावा आपको Company Register कराते समय किसी प्रकार की Capital Investment Proof की जरुरत नहीं पड़ेगी |

Office is mandatory to open a private limited company:

Private Limited Company खोलने के लिए आपको अपनी Company का Office अवश्य बनाना होगा | और अपने ऑफिस का पता Ministry of corporate Affairs के ऑफिस में अपडेट भी कराना होगा | यह ऑफिस आप किसी भी क्षेत्र चाहे वह Commercial Area हो, Industrial हो, या फिर चाहे Residential Area हो, में अपना ऑफिस खोल सकते हैं |

Required documents to open a Private Limited Company in Hindi:

सारे प्रस्तावित Directors का पहचान प्रमाण पत्र के साथ पता प्रमाण पत्र भी आवश्यक है |

सभी Directors की PAN कार्ड की फोटोकॉपी

ऑफिस का Lease Agreement अर्थात Rent Agreement या स्वयं की जमीन है तो उसका प्रमाण पत्र |

यदि जमीन किराये पर ली हुई है तो जमीन के मालिक से No Objection Certificate की भी आवश्यकता होगी |



रजिस्टर कर्ता को स्वयं का पहचान प्रमाण पत्र और Mailing Address का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है |

कम्पनी कितने तरह की होती है

कम्पनी कितने तरह की होती है 

वैसे तो इंडिया में किसी  भी कम्पनी  को विभिन्न तरह से   Register किया जाता है | और इसके  अंतर्गत व्यापार या company  को Register कराने के लिए अलग अलग योग्यता  चाहिए होती है | इसके अलावा कंपनी या व्यापार  को कौन सा दर्जा दिया जाय | इसके लिए कुछ क़ानूनी सीमाओं (Statutory Norms) का प्रावधान किया गया है | यह सब निवेश की गई पूंजी, ऋण की मात्रा एवं वार्षिक कमाई  (Annual Income) इत्यादि पर निर्भर करता है | इनमें से जो मुख्य business entities के types हैं | उनका वर्णन निम्नलिखित है |


 Proprietorship:

इस तरह  के व्यापार  में केवल एक अकेला आदमी सम्पूर्ण उद्योग का  मालिक होता है | बिज़नेस को चलाने के लिए वही पूंजी लगाता है | मजदूर व मशीनें इत्यादि खरीदने के लिए भी खुद जिम्मेदार होता है | Proprietorship में केवल एक व्यक्ति ही व्यापार  सम्बन्धी सारे निर्णय लेता है | इसलिए फायदे और नुकसान का भी वह स्वयं प्रतिभागी होता है |
  
Partnership:

Proprietorship type के व्यापार  में दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी कंपनी या व्यापार  को चला रहे होते हैं | इसलिए संगठन में किसकी क्या भूमिका होगी तय करने हेतु Indian Partnership Act 1932 के अनुसार सभी साझेदारों के द्वारा लिखित तौर पर एक Partnership Deed हस्ताक्षर की जाती है | और इस Partnership deed में लिखित शर्तों एवं नियमो के अनुसार ही Partners द्वारा व्यापार  चलाया जाता है | अत: यह भी स्पष्ट है की कंपनी में  फायदा एवं घाटा  के हिस्सेदार सारे Partners होते हैं |

 Private Limited Company:

एक Private limited company में कम से कम 2 और अधिक से अधिक 15 directors हो सकते हैं | और यदि Share Holders की बात करें तो कम से कम 2 और अधिक से अधिक 200 share holders हो सकते हैं | इस Type के संगठन Companies act 1956 के अंतर्गत Registrar of companies द्वारा अनुबंधित होते हैं | Private Limited Company में कंपनी का एक Memorandum & articles of association बनाया जाता है |जिसमे संगठन के सारे कार्यक्षेत्रों के प्रति नियम एवं शर्तें वर्णित होती हैं | और इसके आधार पर ही कंपनी का संचालन किया जाता है |

Public Limited Company:

Public limited company में कम से कम 7 share holders और कम से कम 3 directors का होना अनिवार्य है | PLC भी companies Act 1956 के अनुसार Registrar of companies के अंतर्गत Registered होती हैं | ऐसी कंपनियों को business start करने से पहले Trading Certificate लेना होता है | Management में कोई नियुक्ति और वैधानिक बैठकें आयोजित करने के लिए सरकार की मंजूरी की आवश्यकता पड़ती है | इसके अलावा public limited company अपने शेयर बेचने हेतु बाज़ार में विज्ञापन प्रसारित करवा सकती हैं | जबकि एक private limited company ऐसा नहीं कर सकती |

यह भी पढ़ें:

Limited Liability Partnership (LLP):

Limited liability partnership अधिनियम सन 2008 में संसद में पारित हुआ था | यह business entities (LLP) business को नम्यता (flexibility) प्रदान करता है | इसमें साझेदार आपसी लिखित समझोतों के माध्यम से अपने अपने दायित्व के लिए सीमा तय कर सकते हैं | LLP में Partnership Act 1932 लागू नहीं होता है | यदि किसी Partner द्वारा कोई अनाधिकृत निर्णय लिया जाता है, तो अन्य पार्टनर इसके परिणामो के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे |

Co-operative society:

Co-operative society को हिंदी में सहकारी समिति कहा जाता है | और सहाकरी समितियां state Co-operative society act 2002 के अंतर्गत राज्य के co-operative department से registered होती हैं | इस प्रकार के संगठन में कम से कम 10 सदस्य हो सकते हैं | और समिति का संचालन Memorandum & articles of association में लिखित शर्तों, नियमों एवं कार्यक्षेत्र के आधार पर ही किया जाता है |

आप का अपना 

अमन मस्ताना कटियार 


रविवार, 28 अगस्त 2016

स्टॉक ग्रुप को अल्टर कैसे करे



सबसे पहले आप को अपने डेस्कटॉप पर बने टैली के आइकॉन पर क्लिक करना है उसके बाद टैली अपना प्रोसेस करने लगे गी। उसके बाद आप से Username  और Password  माँगे गी। तो आप को वो डालना है अगर आप ने कंपनी बनाते समय Username  और Password  नहीं डाला है तो नहीं  माँगे गी। आप को अपनी कम्पनी  सेलेक्ट करनी है। 





उसके बाद आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को दूसरा ऑप्शन  Inventory  Info.  दिखाई  दे गा। आप को उसको सेलेक्ट कर के एंटर मारना है। उसके बाद आप को पहला ऑप्शन STOCK GROUPs  दिखाई  दे गा।

  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Stock Group दिखायी पड़े गा  उसमे तीसरा ऑप्शन  Alter   दिखायी पड़े गा। और  उसके  बाद  आप को अपने द्वारा  बनाये गये लेजर को सेलेक्ट कर के एंटर मारना है और उसके बाद एक छोटा विण्डो खुले गा। जिसमे आप को एक ब्लैक लाइन  दिखाई पड़े गी।  उसमे आप को अपने लेजर ग्रुप का नाम दिखाई पड़े गा।  जैसा मैंने वीडियो में ट्रेक्टर शीट ग्रुप बनाया है 

उसके बाद आप को Enter मारना है उसके बाद आप को Under में Primary ही रहने दे। या अपने आवस्यकता के अनुसार बदल भी सकते है लकिन अभी यही रहने दे। और Enter मारे और उसको सेव करवा दे। आप का लेजर ग्रुप अल्टर हो गया  है 

अगर आप को देखना हो तो पहले भी मैं बता चूका हु की कैसे देखे। और यहाँ भी बता रहा हु आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को  दूसरा ऑप्शन Inventory Info.  दिखाई पड़े गा आप को उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है उसके बाद आप को पहला ऑप्शन  STOCK GROUPs  दिखाई  दे गा। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Stock   Group दिखायी पड़े गा  उसमे दूसरा ऑप्शन  Display दिखायी पड़े गा। उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में सारे आइटम्स  ग्रुप की लिस्ट दिखाई देने लगे गी।  

तो दोस्तों आशा करता हु की आप को समझ में आ गया हो गा अगर कोई परेशानी है तो निचे कमेन्ट करे और अपने दोस्तों को भी बताये। 

आप का अपना 

अमन मस्ताना कटियार 

टैली में लेजर ग्रुप कैसे देखे



आइटम्स ग्रुप क्या होता है तो इसके बारे मैं आप को  पहले भी बता चुका हु आप हमारी पहले की पोस्ट को पड़ सकते है 
तो आईये जानते है अपने पहले ग्रुप की तरफ जिसका नाम है लेजर ग्रुप। . 

लेजर ग्रुप को देखने के लिए हमको टैली में कहा जाना होगा और किस ऑप्शन को खोलना होगा आप चाहे तो हमारा वीडियो भी देख सकते है तो आइये चलते है लेजर ग्रुप कैसे देखा जाये  ...... 

सबसे पहले आप को अपने डेस्कटॉप पर बने टैली के आइकॉन पर क्लिक करना है उसके बाद टैली अपना प्रोसेस करने लगे गी। उसके बाद आप से Username  और Password  माँगे गी। तो आप को वो डालना है अगर आप ने कंपनी बनाते समय Username  और Password  नहीं डाला है तो नहीं  माँगे गी। आप को अपनी कम्पनी  सेलेक्ट करनी है। 



उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Stock

Group दिखायी पड़े गा  उसमे पहला ऑप्शन  Create  दिखायी पड़े गा। 
और  उसके  बाद  आप को  दूसरा ग्रुप Display दिखायी पड़े गा।  जैसा मैंने वीडियो में ट्रेक्टर शीट ग्रुप बनाया है और उसके अंदर में बहुत सारी ट्रेक्टर शीट बनाऊ गा। जिनका नाम अलग -अलग बनाऊ गा। 



उसके बाद आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को  दूसरा ऑप्शन Inventory Info.  दिखाई पड़े गा आप को उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है उसके बाद आप को पहला ऑप्शन  STOCK GROUPs  दिखाई  दे गा। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Stock   Group दिखायी पड़े गा  उसमे दूसरा ऑप्शन  Display दिखायी पड़े गा। उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में सारे आइटम्स  ग्रुप की लिस्ट दिखाई देने लगे गी।  

आप का अपना 

अमन मस्ताना कटियार 

टैली में न्यू लेजर ग्रुप कैसे बनाये


टैली में न्यू  लेजर ग्रुप कैसे बनाये

सबसे पहले आप को अपने डेस्कटॉप पर बने टैली के आइकॉन पर क्लिक करना है उसके बाद टैली अपना प्रोसेस करने लगे गी। उसके बाद आप से Username  और Password  माँगे गी। तो आप को वो डालना है अगर आप ने कंपनी बनाते समय Username  और Password  नहीं डाला है तो नहीं  माँगे गी। आप को अपनी कम्पनी  सेलेक्ट करनी है। 




उसके बाद आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को पहला ऑप्शन  Inventory  Info.  दिखाई  दे गा। आप को उसको सेलेक्ट कर के एंटर मारना है। उसके बाद आप को पहला ऑप्शन STOCK GROUPs  दिखाई  दे गा।

  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Stock Group दिखायी पड़े गा  उसमे पहला ऑप्शन  Create  दिखायी पड़े गा। और  उसके  बाद  आप को एक छोटा विण्डो खुले गा। जिसमे आप को एक ब्लैक लाइन  दिखाई पड़े गी।  उसमे आप को अपने लेजर ग्रुप का नाम डालना है जैसा मैंने वीडियो में ट्रेक्टर शीट ग्रुप बनाया है और उसके अंदर में बहुत सारी ट्रेक्टर शीट बनाऊ गा। जिनका नाम अलग -अलग बनाऊ गा। 

उसके बाद आप को Enter मारना है उसके बाद आप को Under में Primary ही रहने दे। या अपने आवस्यकता के अनुसार बदल भी सकते है लकिन अभी यही रहने दे। और Enter मारे और उसको सेव करवा दे। आप का लेजर ग्रुप तैयार है 

अगर आप को देखना हो तो पहले भी मैं बता चूका हु की कैसे देखे। और यहाँ भी बता रहा हु आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को  दूसरा ऑप्शन Inventory Info.  दिखाई पड़े गा आप को उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है उसके बाद आप को पहला ऑप्शन  STOCK GROUPs  दिखाई  दे गा। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Stock   Group दिखायी पड़े गा  उसमे दूसरा ऑप्शन  Display दिखायी पड़े गा। उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में सारे आइटम्स  ग्रुप की लिस्ट दिखाई देने लगे गी।  

तो दोस्तों आशा करता हु की आप को समझ में आ गया हो गा अगर कोई परेशानी है तो निचे कमेन्ट करे और अपने दोस्तों को भी बताये। 

आप का अपना 

अमन मस्ताना कटियार 


शनिवार, 27 अगस्त 2016

टैली में न्यू ग्रुप कैसे बनाये

टैली  में न्यू ग्रुप कैसे बनाये

सबसे पहले आप को अपने डेस्कटॉप पर बने टैली के आइकॉन पर क्लिक करना है उसके बाद टैली अपना प्रोसेस करने लगे गी। उसके बाद आप से Username  और Password  माँगे गी। तो आप को वो डालना है अगर आप ने कंपनी बनाते समय Username  और Password  नहीं डाला है तो नहीं  माँगे गी। आप को अपनी कम्पनी  सेलेक्ट करनी है। 



उसके बाद आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को पहला ऑप्शन  Accounts  Info.  दिखाई  दे गा। आप को उसको सेलेक्ट कर के एंटर मारना है। उसके बाद आप को पहला ऑप्शन GROUPs  दिखाई  दे गा।

  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Group दिखायी पड़े गा  उसमे पहला ऑप्शन  Create  दिखायी पड़े गा। और  उसके  बाद  आप को एक छोटा विण्डो खुले गा। जिसमे आप को एक ब्लैक लाइन  दिखाई पड़े गी।  उसमे आप को अपने लेजर ग्रुप का नाम डालना है जैसा मैंने वीडियो में Office Equipment ग्रुप बनाया है और उसके अंदर में बहुत सारी Office ke items बनाऊ गा। जिनका नाम अलग -अलग बनाऊ गा। 

उसके बाद आप को Enter मारना है उसके बाद आप को Under में जिस भी ग्रुप में डालना है वो डाले । या अपने आवस्यकता के अनुसार बदल सकते है   जैसा वीडियो में मैंने Office Equipment  को  Fixed  Assets  में डाला है और Enter मारे और उसको सेव करवा दे। आप का  ग्रुप तैयार है 

अगर आप को देखना हो तो पहले भी मैं बता चूका हु की कैसे देखे। और यहाँ भी बता रहा हु आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को  पहला  ऑप्शन Accounts  Info.  दिखाई पड़े गा आप को उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है उसके बाद आप को पहला ऑप्शन  GROUPs  दिखाई  दे गा। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal  Group दिखायी पड़े गा  उसमे दूसरा ऑप्शन  Display दिखायी पड़े गा। उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में सारे  ग्रुप की लिस्ट दिखाई देने लगे गी।  


तो दोस्तों आशा करता हु की आप को समझ में आ गया हो गा अगर कोई परेशानी है तो निचे कमेन्ट करे और अपने दोस्तों को भी बताये। 

आप का अपना 

अमन मस्ताना कटियार 

शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

टैली में ग्रुप कैसे देखे

टैली में ग्रुप कैसे देखे

आज मैं आप सभी को बताऊ गा की टैली में कितने तरह के ग्रुप होते है ,जैसा की मैं आप को पहले बता चुका हु की टैली में ग्रुप दो तरह के होते है आज मैं आप को बता दू की अगर हमको ग्रुप देखने है तो टैली में कैसे देखे गे। टैली में दो तरह के ग्रुप्स के बारे में मैं आप से पहले ही बता चूका हु। 

1. लेजर ग्रुप 
2. आइटम्स ग्रुप 


निचे जो वीडियो दिया गया है उसमे लेजर ग्रुप के बारे में बताया गया है और अब आप को ज्यादा बातो में ना फसाते हुए चलते है अपने मैन पॉइंट पर की टैली में ग्रुप को कैसे देखे या कैसे पहुचे टैली के ग्रुप तक। 

Kya-hota-hai-infolinks-kaise-milte-hai Paise

अब आप सोच रहे होंगे की मैंने जो वीडियो डाला है वो लेजर ग्रुप क्या होता है और आइटम्स ग्रुप क्या होता है तो इसके बारे मैं आप को  पहले भी बता चुका हु आप हमारी पहले की पोस्ट को पड़ सकते है 
तो आईये जानते है अपने पहले ग्रुप की तरफ जिसका नाम है लेजर ग्रुप। . 

लेजर ग्रुप को देखने के लिए हमको टैली में कहा जाना होगा और किस ऑप्शन को खोलना होगा आप चाहे तो हमारा वीडियो भी देख सकते है तो आइये चलते है लेजर ग्रुप कैसे देखा जाये  ...... 

सबसे पहले आप को अपने डेस्कटॉप पर बने टैली के आइकॉन पर क्लिक करना है उसके बाद टैली अपना प्रोसेस करने लगे गी। उसके बाद आप से Username  और Password  माँगे गी। तो आप को वो डालना है अगर आप ने कंपनी बनाते समय Username  और Password  नहीं डाला है तो नहीं  माँगे गी। आप को अपनी कम्पनी  सेलेक्ट करनी है। 



उसके बाद आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को पहला ऑप्शन  Accounts  Info.  दिखाई  दे गा। आप को उसको सेलेक्ट कर के एंटर मारना है। उसके बाद आप को पहला ऑप्शन GROUPs  दिखाई  दे गा। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Group दिखायी पड़े गा  उसमे दूसरा ऑप्शन  Display दिखायी पड़े गा। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में सारे ग्रुप की लिस्ट दिखाई देने लगे गी।  

आइटम्स  ग्रुप कैसे देखा जाये  ...... 

इसमें भी आप को वही करना है। सबसे पहले आप को अपने डेस्कटॉप पर बने टैली के आइकॉन पर क्लिक करना है उसके बाद टैली अपना प्रोसेस करने लगे गी। उसके बाद आप से Username  और Password  माँगे गी। तो आप को वो डालना है अगर आप ने कंपनी बनाते समय Username  और Password  नहीं डाला है तो नहीं  माँगे गी। आप को अपनी कम्पनी  सेलेक्ट करनी है। 






उसके बाद आप के सामने  जो विण्डो खुले गी  उसमे  आप को एक तरफ आप की कम्पनी का नाम और दूसरी तरफ Master s  दिख रहा होगा और उसके नीचे आप को  दूसरा ऑप्शन Inventory Info.  दिखाई पड़े गा आप को उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है उसके बाद आप को पहला ऑप्शन  STOCK GROUPs  दिखाई  दे गा। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में  Singal Stock   Group दिखायी पड़े गा  उसमे दूसरा ऑप्शन  Display दिखायी पड़े गा। उसपर क्लिक करना है और एंटर मारना है। और  उसके  बाद  आप को नयी विंडो में सारे आइटम्स  ग्रुप की लिस्ट दिखाई देने लगे गी।  

आप का अपना 

अमन मस्ताना कटियार 

टैली में ग्रुप किसको कहते है

Hello Dosto,

Tally Me Kitne Tarah Ke Group Hote Hai

Aaj Mai Aap Sabhi Ko Batau Ga Ki Tally me Kitna  Tarah Ke Group Hote Hai, Jaisa Mai Aap Ko Pahle Bata Chuka hu Ki Purchase Bill Kaise Enter Kare Tally Me Waha Par Maine Aap Group Ke Bare Me Bataya Tha.to Aaj Mai Usko Detail Me Batane Ja raha Hu Taki Group Kya Hota Hai Ye Aap Acchi Tarah Se Samajh Sake,


Aaj Mai Aap KO Bata Du Ki Tally Me Group 2 Tarah Ke Hote Hai

1).Ledger Group
2).Items Group
Ab Aap Soch Rahe Hoge Ki Ye Ledger Group Kya Hote Hai Or Items Group Kya Hote Hai.To Ghabraiye Mat Mai Yaha Par Dono Ko Batau Ga Ki Dono Me Kya Anter Hota Hai.To Aayiye Chalte Hai Apne Pahle Group Ki Taraf Jiska Naam Hai Ledger Group.


Ledger Group : - 

Ledger Group Wo Group Hote Hai . Jisme Ham Kisi Bhi Parson Ya Company Ko Janane Ke Liye Ya Apni Company Ki Lendar or Dendar (Debtor & Craditor) Ya Hamri Company Ki Assets (Fix Asstes & Current Assets ) Ya Bank Expence (Direct Ya Indirect Exp) In Sab Cheejo Ke Bare Me Jaan Sakte Hai Jaise Ki Aap Nicche Ki Image Me Dekh Sakte Hai.




Ye Sabhi Group Me Aate Hai.Jo Bhi Aap Ko Image Me Show Ho Raha Hai or Bhi Bahut Tarah ke Group Hote Hai.Aap Isme Apne Suvidha Ke Anusar Bhi Aap Group Bana Sakte Hai Jaisa Ki Aap Ko Jaroorat Ho.

Ledger Group me Kaise Jaye or Kaise Banaye Banaye : - 

Ledger Group me Jane Ke Liye Aap Ko ye Step Karni Pade Gi .
Sabse Pahle Aap Tally Ka Icon Open Kare  >  Uske Baad Aap Apni Banayi Company Ko Select Kare Agar Ek Hi Company Hai To Koi Baat Nahi Usi Ko Select Kare.  >  Fir Uske Baad Master Ke Niche AAp Ko Accounts Info Show Hoga Uspar Click Kare  >  Uspar Enter Mare  > Uske Baad Aap Ko Accounts Info Me Group Dikhe Ga  >  Uspar Enter Mare   Uske Ander Aap Ko 3 Option Show Hoge Unme Aap Apne Group Bana Sakte Hai Ya Kewal Dekh Sakte Hai Ya Galat Hone Par Badal Sakte Hai Jaisa Ki Aap Image Me Dekh Rahe Hai.

Create :- 
Isme Aap Apni Company ka Koi Bhi Naya Group Bana Sakte Hai Jaisa Ki aap Image Me Dekh Rahe Hai

Display :-
Isme Aap Apni Company ka Koi Bhi Group Dekh Sakte Hai Jaisa Ki aap Image Me Dekh Rahe Hai

Alter :-
Isme Aap Apni Company ka Koi Bhi Group Ko Badal Sakte hai agar koi galti Hui Hai  Jaisa Ki aap Image Me Dekh Rahe Hai

Note :- Isme Aap Singal -Singal Ya Multi Group Ek Sath Bana Sakte Hai


To Aap Samajh Gaye Ho Ge Ki Ledger Group Kya Hota Hai.to Ab Chalte Hai Apne Dusre Tarah Ke Group Items Group Ki Taraf .

Items  Group : - 

Items Group Wo Group Hote Hai . Jisme Ham Kisi Bhi Tarah Ke Item Jo Ki Hamari Company Me Use Hote Hai hamara Sale Karne Ke Liye Product Banane Ke Liye Fir Wo Row Matarial (Hamari Company Me Jo Product Banta Hai Usme Use Kiya Jane Wala Matarial Row Matarial Hota Hai ) Ho Ya Finish Matarial ( Ye Wo Matarial Hota Hai Jo Hamari Company Ka Sale Karne Ke Liye Taiyar Hua Hota Hai ) or Jo Koi Alag Tarah Ka Items Hote Hai Un Sab Ko Ek Sath Dekhne Ke  Liye Jo BHi Ham Group Banate Hai Usko Items Group Kahte Hai.

Note : -Samajhne Ke Liye Row Matarial Hamara Hamara Group Hai Inke Ander Jo Bhi Matarial Hamare Product Banane Ke Liye Use Kiya Jata Hai Ex - Dhaga ,Kapda,Gum,Iron,Ya Kuch Or Ye Sab Row Matarial Me Aate Hai To Row Matarial Hamara Group Hai or Ye Sab Ledger Hai .Ledger Kya Hote Hai Or Kitne Tarah Ke Hote Hai Wo Mai Aap Ko Aage Ki Post Me Batau Ga 

Items Group me Kaise Jaye or Kaise Banaye Banaye : - 

Items Group me Jane Ke Liye Aap Ko ye Step Karni Pade Gi .
Sabse Pahle Aap Tally Ka Icon Open Kare Agar Pahle Se Open Hai to Rahne De  >  Uske Baad Aap Apni Banayi Company Ko Select Kare Agar Ek Hi Company Hai To Koi Baat Nahi Usi Ko Select Kare.  >  Fir Uske Baad Master Ke Niche AAp Ko Inventory Info Show Hoga Uspar Click Kare  >  Uspar Enter Mare  > Uske Baad Aap Ko Inventory Info Me Stock Group Dikhe Ga  >  Uspar Enter Mare   Uske Ander Aap Ko 3 Option Show Hoge Unme Aap Apne Group Bana Sakte Hai Ya Kewal Dekh Sakte Hai Ya Galat Hone Par Badal Sakte Hai Jaisa Ki Aap Image Me Dekh Rahe Hai.

Create :- 
Isme Aap Apni Company ka Koi Bhi Naya Ledger Bana Sakte Hai Jaisa Ki aap Image Me Dekh Rahe Hai

Display :-
Isme Aap Apni Company ka Koi Bhi Ledger Dekh Sakte Hai Jaisa Ki aap Image Me Dekh Rahe Hai

Alter :-
Isme Aap Apni Company ka Koi Bhi Ledger Ko Badal Sakte hai agar koi galti Hui Hai  Jaisa Ki aap Image Me Dekh Rahe Hai

Note :- Isme Aap Singal -Singal Ya Multi Ledger Ek Sath Bana Sakte Hai Lakin Mai To Bolu Ga Ki Aap Singal Singal Hi Banaye To Behtar Hoga.


To Aap Samajh Gaye Hoge Ki Item Group Or Ledger Group Kya Hote Hai  Agar Uske Baad Bhi Koi Paresani Hoti Hai Group Banane Me To Aap Hamse Nicche Comment Kar Ke Puch Sakte Hai.

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Aap Ka Apna

Aman Mastana Katiyar

मंगलवार, 16 अगस्त 2016

अपनी कम्पनी को कैसे खोले टैली में


अपनी कम्पनी को कैसे खोले टैली में

हेल्लो दोस्तों ,

आज मैं आप सब को बेसिक एकॉउंटस की दूसरी स्लाइड में बताने जा रहा हु की जब हमारी कम्पनी तैयार हो जाती है मतलब की जब हम टैली में अपनी न्यू कम्पनी बना  लेते है उसके बाद हमको टैली  में अपनी कम्पनी को कैसे ओपन करना है 

टैली में नई कम्पनी कैसे बनाये देखने के लिए  हमारी  पहली स्लाइड देखे  वीडियो के साथ में 

सबसे पहले आप को अपने कम्प्यूटर की मैंन स्क्रीन पर जाये और उसमे टैली का आइकॉन (टैली  का लोगो ) पर क्लिक करे। जैसे ही आप आइकॉन पर क्लिक करे गे वैसे ही टैली अपना काम चालू कर दे गी और आप के सामने एक नयी विण्डो खुल कर आ जाये गी। जिसका कलर ग्रीन होगा निचे दिए गए इमेज की तरह। 



जब आप की ऊपर दी गयी  विंडो खुल जाये तब आप को सबसे पहला ऑप्शन दिखाई दे गया  Select  company  अब आप को वही पर अपनी कीबोर्ड की एंटर  ENTER  की बटन दबानी है उसके बाद वो कुछ देर प्रोसेस करने के बाद दूसरी विण्डो खुल कर सामने आ जाये गी। जैसा की आप इस इमेज में देख रहे है माना की आप की कंपनी का नाम RAM SHAYM PVT.LTD.  है जैसा की इस विंडो में दिख रहा है। 

जब आप  अपनी कम्पनी को सेलेक्ट कर के एंटर ENTER की बटन दबानी है तो नयी विण्डो ;खुल कर आप के सामने आ जाये गी। जिसमे आप को कई सारे ऑप्शन दिखायी देने लगे गे। और एक तरफ आप के  द्वारा  बनायीं गयी कम्पनी का नाम दिखाई दे गा। और दूसरी तरफ आप को बहुत सारे ऑप्शन दिखाई दे गे  जैसे  मास्टर ( Master -Accounts info ,Inventery  info etc.  ) Transaction (Accounting  Vouchers  , Inventery Vouchers   etc.  ) जैसा की आप इस  इमेज  में  देख रहेहै  


तो अब आप समझ गए होंगे की टैली में अपनी कम्पनी को कैसे खोलते है  लेकिन अगर उसी टैली में दूसरी भी कम्पनी बनी हो और वो भी धोखे से आप की कम्पनी के साथ -साथ आप से खुल गयी हो। या गलती से आप ने अपनी कम्पनी की जगह पर दूसरी कम्पनी खोल ली हो और अब आप उस कम्पनी को बंद करना चाहते है तो आप को वही पर   " ART + F 3 "  दबाना पड़े गा  इसको दबाते ही आप  के सामने दूसरी विण्डो खुल जाये गी। जिसमे एक ऑप्शन सामने आये गा  " SHut Company " जैसा इमेज में दिख रहा है। 


आप को उस ऑप्शन को सेलेक्ट करके एंटर  ENTER  मारना है आप को जो कम्पनी बंद करनी हो उसको सेलेक्ट करे और फिर से एंटर  ENTER  मारे। अब उसके बाद आप को अपने कीबोर्ड में  ESC की बटन दबानी है अब वही पहले वाली विण्डो दिखाई देने लगे गी।   


अब वो कम्पनी बंद हो गयी है अगर आप की कम्पनी भी साथ में खुली है तो केवल वो ही दिखाई दे गी। और अगर केवल वो कम्पनी ही खुली थी तो आप की कंपनी की जगह पर खाली होगी कुछ इस तरह। 


और अपनी कम्पनी खोलने के लिए आप को वही प्रकिरिया करनी है जो पहले की थी और अगर आप की कंपनी दिखाई दे रही है तो सही है 

मास्टर ( Master -Accounts info ,Inventery  info etc.  ) Transaction (Accounting  Vouchers  , Inventery Vouchers   etc.  ) के ऑप्शन से क्या होता है उसके लिए मैं अपनी आगे की स्लाइड में बताऊ गा। 

निचे वीडियो देखे 





तो दोस्तों आशा करता हु की आप को समझ में आ गया हो गा अगर कोई परेशानी है तो निचे कमेन्ट करे और अपने दोस्तों को भी बताये। 

आप का अपना 

अमन मस्ताना कटियार 

शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

क्या होता है G. S. T

क्या होता है G. S. T 

हेल्लो दोस्तों

जैसा की आप सब जानते है की GST बिल पास हो चुका है तो क्या परिवर्तन होने वाले है हमारी पर्सनल जिंदगी में और किस तरीके से हमको इस का प्रभाव पड़ने वाला है। आज मैं आप को इसी GST  के बारे में बताने जा रहा हु और इसके कुछ पहलु आप के सामने पेश करने जा रहा हु।  आशा करता हु की आप को ये जानकारी अच्छी लगे गी  तो आइये जानते है क्या है GST .


GST क्या है इसका पूरा नाम : - GST का पूरा नाम गुड्स एंड सर्विस टैक्स (Goods And Service tax )

GST क्या है :- GST एक ऐसा टैक्स है जो राष्ट्रीय स्तर पर किसी सामान या सेवा की मैन्युफैक्चरिंग (बनाने), बिक्री  और इस्तेमाल पर लगाया जाता है।

GST के आने से कितने और कौन से टैक्स सामाप्त हो जाये गे :- GST के आने से 18 तरह के टैक्स सामाप्त हो जाये गे। जैसे चुंगी ,सेंट्रल सेल टैक्स (CST ) ,वैट (स्टेट टैक्स) ,एंटरी टैक्स ,लाटरी टैक्स ,स्टाम्प डियूटी , टेलीकॉम लाइसेंस फी , टर्नओवर टैक्स ,बिजली के इस्तेमाल या बिक्री (सेल) पर लगने वाले टैक्स ,सामान के ट्रान्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स इत्यादि सामाप्त हो जाये गे।

GST के आने से क्या फायदे है :- GST अभी की तरह बहुत जगह पर ना लग कर  केवल डेस्टिनेशन (मैन जगह) पोइन्ट पर लगे गा। अभी तो फैक्ट्री से निकलने पर टैक्स लगता है।  उसके बाद होल सेलर या जहा सामान बेचा जाता है मतलब की रिटेल पॉइंट पर टैक्स लगता है  लेकिन इसके आने से ये केवल एक जगह  डेस्टिनेशन पोइन्ट पर लगे गा।

GST  के बारे में जरूरी जानकारी 


GST के आने से टैक्स का ढाँचा आसान हो जाये गा इसके दायरे से बहुत कम सामान और सेवाएं बच पाए गी।

GST के आने से एक्सपोर्ट ,रोजगार और आर्थिक विकास में देश को सालाना अरबो रूपए की आमदनी होगी।

GST के बाद जिस राज्यो में और केंद्र में दोनों जगह टैक्स केवल बिक्री के समय वसूले जाये गे। और इसकी कास्ट इसकी बनाने की लागत के हिसाब से तय होंगे। इससे सामान और सेवाओ के दाम कम होंगे। और आम कंज्यूमर को फायदा होगा। दाम कम होने से इसकी खपत बढे गी।

कंपनी का प्रॉफिट बढे गा और  कंपनियों पर टैक्स का बोझ कम होगा। टैक्स बिक्री की जगह पर लगने के कारण इसकी बनाने की कास्ट (खर्चा ) कम आये गी। और एक्सपोर्ट मार्केट में भी इसकी कीमत कम होने के काऱण हमारा प्रोडक्ट ज्यादा यूज़ किया जाये गा।

GST की न्यूनतम सीमा :- इसका अन्तिम फैसला अभी बाकि है लेकिन अनुमान है की इसको लगाने के लिए ग्रॉस सालाना टर्नओवर कम से कम 10 लाख रूपए होगी। ये गुड्स और सर्विसेज को दोनों को मिलाने पर ये टर्नओवर माना जाये गा।

इसकी आनुमानिक दरे अधिकतम 18 फीसदी होगी। इसको राज्य सभा में क्लियर होने के बाद इसकी दरो का पता चल पाए गा। हो सकता है बाद में इसकी दरों को बढ़ाया या घटाया जाये।

GST कितने तरह का लगे गा :-  GST  टैक्स 3 तरह लगाया जाये गा।

- CGST  यानी की सेन्ट्रल GST  : - ये केन्द्र सरकार के द्वारा लगाया जाये ग़ा।
- SGST  यानी स्टेट GST  : -  ये  राज्य  सरकार के द्वारा लगाया जाये ग़ा।
- IGST  यानी इंट्रिग्रेटेड  GST : - ये तब लगे गा जब कोई कारोबार 2 राज्यो के बीच होगा। इसको केंद्र सरकार वसूल कर के बराबर दोनों राज्यो में बॉट देगी।

क्या -क्या है अभी बकाया GST को लागू  करने के लिए : -

- संसद  के बाद अभी राज्य विधानसभाओ से मँजूरी बाकी है। 

- आधे से ज्यादा राज्यो की विधान सभाओ की मँजूरी चहिये। 
- GST  के लिए IT  इन्फ्रास्ट्रक्चर  तैयार करना है। 

GST  से क्या  - क्या  बाहर  होंगे  : -

- पेट्रोलियम  प्रोडक्ट ,अल्कोहल ,स्टाम्प ड्यूटी ,कस्टम ड्यूटी , इलेक्ट्रिसिटी की बिक्री और कंजप्शन पर
 टैक्स।  एंटरटेनमेंट

GST  से क्या  - क्या  होगा सस्ता और क्या होगा महगा  : - GST  के आने से बहुत  सी रोजमर्या  से जुडी  वस्तुये  होगी महँगी  और  कुछ वस्तुये  होगी  सस्ती  जैसे  घर  ,बड़ी गाड़ी  , सस्ता हो सकता है और वही गारमेंट्स  , ज्वेलरी  , जैसी कुछ वस्तुओ के  महंगे  होने  के अनुमान है। मूवी  देखना  होगा  सस्ता  और ऐ सी , फ्रीज़  , वसिग  मशीन  होंगे  सस्ते   ,चाय  काफी  महगे  होंगे  ,   रेस्तरां  में  खाना  महगा होगा ,मोबाइल पर बात करना महगा होगा  ,डिस्काउंट  या  सेल के आइटम  महगे  होंगे। 


आशा करता हु की आप को ये जानकारी अच्छी लगी होगी। आप को ये जानकारी कैसी लगी बताना ना भूलिये गा। जब ये पूरी तरह से आ जाये गा तब और अधिक जानकारी दू गा।  अभी के लिए यही कुछ जानकारी हमारे पास थी


आप का अपना

अमन मस्ताना कटियार 

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

क्या होता है टीसीएस किसको देना होगा



हैल्लो दोस्तों ,

आज मैं आप को जो बताने जा रहा हु उसको  टीसीएस  कहते है आइए जानते है। क्या  होता है टीसीएस किसको  देना होगा टीसीएस। 




क्या  होता है टीसीएस :-

सरकार ने 1 जून 2016 से टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स को मोटर व्हीकल पर लागू किया है।  टीसीएस का फुल फॉर्म टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स होता है। ये टैक्स मोटर व्हीकल के रिटेल खरीद और बिक्री पर लगे गा। सी बी डी टी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज )  ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 206 का दायरा बढ़ा कर इस टैक्स को लागु किया गया है। सेक्शन की सारी जानकारी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44-ए बी में स्पस्ट की गयी है की 10 लाख रूपए से अधिक कीमत की गाड़ी या 2 लाख रूपए कॅश से अधिक ,पेमेन्ट कर कोई गाड़ी खरीदता है तो उसको 1 फीसदी (१ %) टैक्स देना होगा। ये केवल व्यक्तिगत खरीदारी पर लागू किया गया है। किसी कम्पनी पर लागू नहीं होगा। इसमें बेचने वाला व्यक्ति अपने कस्टूमर से   1 फीसदी (१ %) टैक्स लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट  में जमा कराये गा। 

कितना टैक्स लगे गा और किसको देना होगा :-

टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स के तहत  10 लाख रूपए से अधिक कीमत की गाड़ी या 2 लाख रूपए कॅश से अधिक ,पेमेन्ट कर कोई गाड़ी खरीदता है तो उसको 1 फीसदी (१ %) टैक्स देना होगा।  सी बी डी टी(सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज ) ने ये बताया है की ये टैक्स केवल रिटेलर को ही अपने कस्टमर से 1 बार लेना होगा। ये टैक्स   मैन्‍युफैक्‍चरर्स या डिस्‍टीब्‍युटर्स  पर नहीं लगे गा । ये टैक्स रिटेलर की हर एक बिक्री पर लगे गा। ये एक  साल के भीतर किये गए पूरी बिक्री पर नहीं लगे गा ।
क्या फायदा है टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स से :-

टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स के तहत  10 लाख रूपए से अधिक कीमत की गाड़ी या 2 लाख रूपए कॅश से अधिक ,पेमेन्ट कर कोई गाड़ी खरीदता है तो उस पर टैक्स लगता है ये टैक्स लगाने का सरकार का मकसद देश में ब्लैक मनी को रोकना है इसके जरिये ब्लैक मनी का इस्तेमाल ज्यादातर महगी गाड़ियों को खरीदने में किया जाता है उस पर रोक लगाना है और अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी सालाना इनकम और उसके द्वारा दिए गए कॅश पेमेन्ट को मिलाया जाये गा। अगर दोनों में किसी तरह का कोई हेर - फेर  होता है तो वो इनकम टैक्स के क़ानूनी दायरे में आये गा। 

सरकार का मानना है की इससे  ब्लैक मनी में कुछ कमी आये गी। और लोग अपनी इनकम का सही -सही ITR  फाइल करे गए गे। 

तो आप को हमारा ये ब्लॉग कैसा लगा बताना ना भूलिये गा अगर पसन्द आया हो तो अपने दोस्तों को हमारे बारे में जानकारी दे। अगर आप को कोई परेशानी होती है तो आप निचे कमेंट कर के पूछ सकते है। 

आप का अपना 


अमन मस्ताना कटियार 

गुरुवार, 16 जून 2016

काले धन पर अंकुश आयकर के संशोधित नियम 114ई

काले धन पर अंकुश आयकर के संशोधित नियम 114ई 

हेलो दोस्तों ,

नगद बिक्री और नगद भुगतान
पर अपरोक्ष रूप से पाबन्दी
🏼
काले धन पर अंकुश लगाना मोदी सरकार का चुनावी मुद्दा रहा है और इस दिशा में कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने नगद लेन देन पर रोक लगाने के लिए आयकर नियमों में परिवर्तन किये हैं क्योंकि नगद लेन देन काले धन को बढाने में अहम भूमिका अदा करतें हैं। 


आयकर के संशोधित नियम 114ई के मुताबिक अगर कोई व्यापारी किसी भी ग्राहक, चाहे वह कोई व्यक्ति या अन्य कोई दूसरा व्यापारी ही क्योँ न हो, से बिक्री की एवज में अगर पूरे साल भर में 2 लाख रूपये से अधिक का भुगतान अगर नगद में प्राप्त करता है, तो बेचने वाला व्यापारी इस तरह से प्राप्त नगद भुगतान व भुगतान करने वाले व्यक्ति से सम्बंधित सुचना पैन नम्बर सहित आयकर विभाग को मुहया करवाएगा।

क्रेता के पैन नम्बर की सत्यापन की जिम्मेदारी विक्रेता की है। अतः उसे इस तरह के क्रेता से पैन कार्ड की छायाप्रति लेनी होगी। क्रेता का पैन नम्बर उपलब्ध न होने पर विक्रेता को उससे फॉर्म 60/61 लेकर आयकर विभाग को प्रेषित करना होगा।

साथ ही 2 लाख रू. से ऊपर के बिल पर खरीददार का पैन नम्बर अंकित करना भी अब अनिर्वाय कर दिया गया है।

आयकर विभाग इस सुचना के आधार पर नगद भुगतान करने वाले व्यक्तियों की निगरानी करेगा और पता लगायेगा कि वे लोग अपनी आयकर की रिटर्न पेश कर रहे है कि नहीं, और पेश कर रहे हैं तो क्या उनके द्वारा घोषित आय साल भर में उनके द्वारा किये गए नगद भुगतान को देखते हुए पर्याप्त है ?

किसी तरह की अनियमितता मिलने पर उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी | यह सुचना विक्रेता द्वारा अलग से एक वार्षिक विवरणी फार्म सं. 61A के माध्यम से पेश की जायेगी लेकिन सुचना देने का नियम उन्ही व्यापारियों पर लागु होगा जिनका आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत ऑडिट होता है |

उदाहरण के लिए 1 अप्रेल 2016 के बाद अगर कोई व्यक्ति अपना घर बनवाने के लिए भी लकड़ी खरीदता है और दो लाख रूपये से ज्यादा का नगद भुगतान करता है तो उसकी सुचना आयकर विभाग में जायेगी | ऐसे ही अगर कोई व्यक्ति शादी के लिए कपड़ा खरीदता है और दो लाख रूपये से ज्यादा का नगद भुगतान करता है तो उसकी सुचना भी आयकर विभाग के पास जायेगी। इसी प्रकार अगर कोई व्यापारी भी नगद में माल खरीदता है तो उसकी भी सुचना आयकर विभाग में जायेगी।


नगद भुगतान करने या प्राप्त करने पर एक और जबरदस्त प्रहार आयकर अधिनियम की धारा 206C में संशोधन के द्वारा किया गया है।

1 जून 2016 से अगर कोई व्यापारी किसी व्यक्ति या अन्य किसी व्यापारी को 2 लाख रूपये से अधिक का माल (एक बिल से) बेचता है और विक्रय राशि में से एक रुपया भी नगद में प्राप्त करता है तो वह क्रेता से सम्पूर्ण विक्रय राशि का 1 % टैक्स (टी.सी.एस.) के रूप में कलेक्ट करके आयकर विभाग में जमा करवाएगा एवं  इस राशि का समायोजन क्रेता को उसकी रिटर्न भरते समय मिल जायेगा |

उदाहरण के लिए अगर कोई व्यापारी किसी को 3 लाख रूपये का उधार माल (एक बिल से) बेचता है और सारा का सारा भुगतान बैंक के माध्यम से प्राप्त करता है तो उसे 1% टैक्स वसूल करने की आवश्यकता नही है | लेकिन 3 लाख रूपये में से 100 रूपये भी नगद में प्राप्त करता है तो जिस दिन नगद भुगतान प्राप्त करता है उस दिन उसे क्रेता से पुरे 3 लाख रूपये पर 1% की दर से टी.सी.एस. यानि
3000/- रूपये वसूल करके सरकार के खाते में जमा करवाने पड़ेंगे।

इसी प्रकार अगर कोई व्यक्ति किसी अस्पताल में ईलाज करवाता है और 2 लाख से अधिक का भुगतान नगद में करता है तो उसे अस्पताल की फीस के अलावा 1% टी.सी.एस. भी चुकाना होगा।

इतना ही नही विक्रेता एवं सेवा प्रदाता को यह सुचना आयकर विभाग में भिजवाने के लिए चारों तिमाही की टी.सी.एस. की रिटर्न भी भरनी पड़ेगी |

आने वाले समय में ये दोनों नियम विक्रेता एवं क्रेता दोनों को परेशान करने वाले हैं |  विक्रेता को वित्तीय लेन देन की वार्षिक रिटर्न भरनी होगी तथा क्रेता से 1% टैक्स वसूल करके सरकार के खाते में जमा करवाना पड़ेगा और फिर चारों तिमाहियों की टी.सी.एस. की रिटर्न भी भरनी पड़ेगी।

इन सब कार्यों में काफी समय और एनर्जी बर्बाद होगी और कम्प्लायेंस कोस्ट भी बढ़ेगी। दूसरी तरफ क्रेता अथवा नगद भुगतान करने वाले व्यक्ति पर आयकर विभाग की नजर रहेगी और वह आयकर विभाग की गहन निगरानी में रहेगा।

इसलिए नगद भुगतान करते या लेते समय पूरी सावधानी बरतें। इस तरह से सरकार ने अपरोक्ष रूप से नगद लेन देन पर पाबंदी लगाने की कोशिश की है।



क्या होता है HUF इनकम टैक्स में

क्या होता है HUF इनकम टैक्स में

हैलो  दोस्तों ,

आज मैं जो भी आप को बताने जा रहा  हु उसकी डिमांड हमारे पिछले पोस्ट में कमेन्ट के द्वारा  पूछे गए है मैं आप सभी का आभारी हु की आप लोगो को हमारा ब्लॉग पसंद आ रहा है और आप सब हमको कमेंट के द्वारा नयी पोस्ट लिखने के लिए प्रेरित करते रहते है



हमारे पास बहुत से कमेंट आये जिसमे कुछ लोगो ने पूछा है की क्या होता है HUF एकाउंट्स और ये कैसे बनता है और इसका इनकम टैक्स में क्या फायदा मिलता है

क्या होता है HUF 
         HUF का पूरा नाम ( हिन्दू  अबिभाजित परिवार ) ये इनकम टैक्स में  बचत करने का महत्वपूर्ण तरीका है क्यों की हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF को इनकम टैक्स विभाग को एक इंडिविजुअल (अलग ईकाई ) की  तरह देखता है
  
कैसे बनता है HUF   ( हिन्दू  अबिभाजित परिवार )         
         हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF के नाम बैंक में एक खाता खुलवाया जाता है जो की उस परिवार के मेन  मुखिया के नाम होता है लेकिन उस मुखिया के नाम के आगे HUF  जुड़ा होता है मुखिया को हम कर्ता भी कह सकते है जब हिन्दू  अबिभाजित परिवार का खाता बैंक में खुल जाता है तो उसके बाद की प्रकिरिया होती है  हिन्दू  अबिभाजित परिवार के नाम से पैन कार्ड  (Pan  Card ) का आवेदन किया जाता है और वो पैन  कार्ड  HUF  के नाम ही बनता है
       ये पैन  कार्ड भी मुखिया या कर्ता के नाम बनता है लेकिन उसके आगे बैंक खाते की तरह हिन्दू  अबिभाजित परिवार(HUF ) लिखा रहता है

कर्ता या मुखिया कौन होता है 
         जैसा की आप समझ सकते है  इनकम टैक्स के हिसाब से परिवार का कोई सबसे बड़ा सदस्य या किसी परिवार का मैन  सदस्य उसका पिता भी हो सकता है कर्ता का रोले HUF  में मैन मुखिया की तरह होती है या उसको हम HUF का मैनेजर भी कह सकते है और बाकि सदस्यों को हम HUF का पार्टनर  बोल सकते है
        ये जरूरी नहीं है की जो कर्ता हो वो और उसके फैमिली के सदस्य एक ही छत  नीचे रहते हो लेकिन ये जरूरी है की जो कर्ता हो वो परिवार के सारे दायित्व और देखभाल करता हो

HUF   ( हिन्दू  अबिभाजित परिवार )  की शर्ते 
       हिन्दू  अबिभाजित परिवार के लिए  व्यक्ति का शादीशुदा होना जरूरी  है अगर हस्बैंड  वाइफ हिन्दू  अबिभाजित परिवार बनाना  चाहते है तो उसका बच्चा होना जरूरी है अगर बच्चा नहीं है तो फ्यूचर में होने वाले बच्चे का या आने वाले बच्चे का जिंक कर के बना सकते है

     हिन्दू  अबिभाजित परिवार के अंतर्गत हिन्दू ,सिख ,ईसाई ,बौद्ध ,और जैन धर्म के लोग ही आते है इसके अंतर्गत पत्नी बच्चे और बच्चों के बच्चे (नाती और नातिन) आ सकते है या बहुत छोटे रूप में देखा जाये तो इसके पत्नी और पति तथा होने वाले बच्चे को जिक्र कर के बन सकता है लेकिन इसमें सयुक्त परिवार का होना जरूरी है
   
    बड़े से बड़ा परिवार हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF हो सकता है लेकिन उसका सयुकत होना बहुत जरूरी होता है

   किसी रिस्तेदार या किसी दोस्त से गिफ्ट लेकर हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF बनाया जा सकता है लकिन अगर कोई HUF हिन्दू  अबिभाजित परिवार का सदस्य  है तो वो किसी दूसरे हिन्दू  अबिभाजित परिवार के सदस्य को गिफ्ट नहीं दे सकता है अगर वो ऐसा करता है तो इनकम टैक्स में करदाता को छूट नहीं मिले गी। करदाता नया हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF बना सकता है

    इसमें कोई करदाता अपनी सम्पत्ति का कुछ भाग हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF को दे सकता है इसमें हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF को  इनकम टैक्स में छूट मिले गी।

    हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF में किसी मेमबर या कर्ता की मौत हो जाती है तब भी हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF बरक़रार रहेगा।

    नए नियमों के तहत हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF के व्यक्ति की कुल इनकम 10 लाख़ रूपए से ऊपर है तो ई - रिटर्न भरना जरूरी है। और पत्नी अलग से हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF नहीं बना सकती है लेकिन हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF के सदस्य किसी दूसरे व्यक्ति के साथ हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF बना सकते है।

हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF के बेनिफिट क्या है 

       हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF का सदस्य दो तरह से बेनिफिट ले सकता है एक इंडिविजुअल में 1.70 लाख और HUF में 1.70  लाख का। अगर किसी को पैट्रिक सम्पत्ति मिली है तो वो HUF का सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते है

   HUF में पूजी बनाने का सबसे अच्छा तरीका है की वशिहत में मिली सम्पत्तियों को HUF में शामिल किया जाये। अगर कोई पुस्तैनी जायजाद बेचीं जाती है तो उससे मिली रकम को भी HUF में भी ट्रांसपर  किया जा सकता है।

  जो पुस्तैनी जायजाद बेचीं जाती है उसमे टैक्स बचत के लिए हिन्दू  अबिभाजित परिवार HUF का सहारा ले सकते है हिन्दू  अबिभाजित परिवार  PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड ) खाता भी  खोल सकता है

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अमन मस्ताना कटियार

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